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भिलाई। भाजपा संसदीय दल की दिल्ली में हुई बैठक में पीएम मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी राज्यों की कमान नए चेहरों के हाथों में होगी। मतलब स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ समेत तीनों राज्यों में भाजपा इस बार पुराने के बजाए नए चेहरों को सामने लाने जा रही है। छत्तीसगढ़ से डॉ. रमन सिंह और मध्यप्रदेश से शिवराज सिंह चौहान के साथ ही राजस्थान से वसुंधरा राजे सिंधिया की ताजपोशी की संभावना अब खत्म होती दिख रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व तीनों राज्यों में भविष्य की तैयारियों के हिसाब से नेतृत्व तैयार करना चाह रहा है। फिलहाल किन चेहरों को राज्यों की बागडोर सौंपी जाएगी, इस पर संशय बरकरार है।
क्या मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा नए चेहरे की लाने का प्लान बना चुकी है? कई दिनों से इस बारे में खबरें चल रही हैं, लेकिन अब इस सवाल का जवाब हां के तौर पर ही मिलता दिख रहा है। दरअसल गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी जब संसदीय दल की मीटिंग में पहुंचे तो उन्होंने तीन राज्यों में जीत का भी जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने जबरदस्त जीत के लिए कार्यकर्ताओं को क्रेडिट दिया और कहा की यह टीम वर्क का नतीजा है। उन्होंने कहा कि हमें टीम वर्क से यह सफलता मिली है और आगे भी इसे बनाकर रखना है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का नाम नहीं लिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश के मौजूदा सीएम शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी कुछ नहीं कहा। इसके अलावा मध्य प्रदेश की लाडली बहना स्कीम का भी पीएम नरेंद्र मोदी ने जिक्र नहीं किया। ऐसे में माना जा रहा है कि पुराने दिग्गजों की बजाय भाजपा किसी नए चेहरे को ही सीएम बनाएगी। बैठक में मौजूद रहे एक सांसद ने कहा कि राज्यों में सभी कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास से जीत मिली है। पीएम मोदी ने कहा, ‘पार्टी की स्थापना से लेकर आज तक समय-समय पर योगदान देने वाले सभी नेताओं की वजह से आज यह स्थिति है। उसी दौर से सामूहिक प्रयास की परंपरा रही है। इस बार भी टीम वर्क के चलते हमें जीत हासिल हुई है।Ó
एंटी इनकम्बैंसी के दावों को फेल किया
पीएम मोदी ने कहा कि हमने हमेशा ही एंटी-इनकम्बैंसी जैसी चीजों को गलत साबित किया है। इसकी बजाय प्रो-इनकम्बैंसी की स्थिति हमारे काम से बनी है। हमने जनता के हित में योजनाएं चलाई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान सभी सांसदों से कहा कि वे विकसित भारत यात्रा में शामिल हों। इस यात्रा में शामिल होकर वे लोगों को बताएं कि सरकार ने अब तक उनके लिए क्या स्कीमें चलाई हैं। इसके अलावा लोग कैसे उनका फायदा ले सकते हैं, यह भी बताया जाए। यह यात्रा 25 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा सरकारों के रिपीट होने का स्ट्राइक रेट 58 पर्सेंट है। जबकि कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 17 फीसदी ही है। पीएम मोदी की ओर से किसी नेता का नाम न लेने से साफ है कि तीनों राज्यों में भाजपा किसी नए चेहरे को ला सकती है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में भी यही फॉर्मूला लागू किया गया था।
हार के बहाने ढूंढती है कांग्रेस- रमन
इधर, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस के ईवीएम में गड़बड़ी वाले आरोपों पर कहा कि ईवीएम नहीं कांग्रेस खुद अपनी हार के लिए जिम्मेदार है। रमन सिंह ने कहा, कांग्रेस जहां हारती है, वहां अपनी हार को बर्दाश्त नहीं कर पाती है और हार का कारण ढूंढऩे लगती है। उन्होंने कहा कांग्रेस को अनुमान लगाने में चूक हुई है। कांग्रेस ने जिस प्रकार 5 साल सरकार चलाई उसके बाद सरकार को जाना ही था। जनता ने पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार के खिलाफ वोट देकर अपना आक्रोश प्रकट किया है। जनता ने उनके तानाशाही रवैया और अहंकार के प्रति विरोध प्रकट किया है। छत्तीसगढ़ की जनता ने पूरी तरह से कांग्रेस को नकार दिया है। महादेव ऐप और भ्रष्टाचार को लेकर रमन सिंह ने कहा, महादेव ऐप पर इतनी सारी जांच चल रही है। ईडी ने पूरे प्रमाण भी प्रस्तुत किए है। महादेव ऐप या भ्रष्टाचार के दूसरे मामले में जांच में तेजी आएगी।
छत्तीसगढ़ में तस्वीर अब भी अस्पष्ट
दिल्ली में दो दिनों से चल रही कवायद के बाद भी पार्टी अब तक किसी भी राज्य में नए चेहरा तय नहीं कर पाई है। हर कुछ समय बाद एक नया नाम सामने आने से भाजपा के कार्यकर्ताओं में भी असमंजस के हालात हैं। बताते हैं कि छत्तीसगढ़ का चेहरा आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के बीच फंसकर रह गया है। हालांकि यह करीब करीब स्पष्ट हो चुका है कि पार्टी किसी आदिवासी चेहरे पर दाँव लगा सकती है। लेकिन राज्य में ऐसे करीब आधा दर्जन नाम सामने आ रहे हैं। अचानक कभी महिला सीएम की बात होने लगती है। संसदीय दल की बैठक के बाद संभव है कि तीनों राज्यों के लिए पर्यवेक्षक तय किए जाएंगे। ये पर्यवेक्षक रायपुर आकर विधायकों से रायशुमारी करेंगे और उसके बाद नए नेता का ऐलान किया जाएगा। फिलहाल तो छत्तीसगढ़ की तस्वीर पूरी तरह से अस्पष्ट है। भाजपा ने छत्तीसगढ़ से अपने 4 सांसदों को विधानसभा का टिकट दिया था। इसमें से तीन सांसदों को जीत मिली, जबकि एक सांसद विजय बघेल पराजित हो गए थे। दो सांसद अरुण साव और गोमती साय पहले ही सांसद पद से इस्तीफा दे चुके हैं। खबर है कि आज केन्द्रीय मंत्री व राज्यसभा सांसद रेणुका सिंह भी इस्तीफा दे सकती हैं।