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रायपुर ( न्यूज़)। भाजपा ने छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव की तैयारी यूं तो काफी पहले से शुरू कर दी थी, लेकिन चुनाव अभियान का श्रीगणेश केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह 22 फरवरी को करने जा रहे हैं। अभियान की शुरूआत उस जांजगीर चाम्पा क्षेत्र से होने जा रही है, जहां से भाजपा को हालिया सम्पन्न विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। भाजपा इस सीट समेत कोरबा और बस्तर की सीटों पर भी ज्यादा फोकस कर रही है। खबर है कि माहांत तक छत्तीसगढ़ के 11 में से कुल 5 प्रत्याशियों का ऐलान करने की तैयारी है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अब तक विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के सदमे से उबार नहीं पाई है। दूसरी तरफ भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देना भी शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी का अभियान जल्द शुरू होने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ में बीजेपी के चुनाव अभियान का आगाज 22 फरवरी को करने जा रहे हैं। इस दिन वे बिलासपुर के जांजगीर में एक आमसभा को संबोधित करेंगे। इसी तरह 24 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों को वर्चुअल संबोधित करेंगे। हालिया सम्पन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा था। भले ही कांग्रेस के नेता इस बार राज्य में भाजपा से ज्यादा सीटें जीतने के दावे कर रहे हों, लेकिन उनके भीतर चुनाव को लेकर वह उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। पार्टी के सीनियर नेता लगभग सुप्त पड़े हुए हैं। राजनीतिक हालात और केन्द्रीय परिस्थितियों के चलते भाजपा के नेता राज्य की सभी 11 सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहले राहुल गांधी की न्याय यात्रा राज्य के कुछ हिस्सों से गुजरी तो वहां कुछ माहौल देखने को मिला, लेकिन यात्रा के दीगर राज्य में जाते ही स्थितियां फिर जस की तस हो गई।
इन सीटों पर घोषित होंगे प्रत्याशी!
भाजपा शीर्ष और प्रादेशिक नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि उसे राज्य की सभी 11 सीटों पर जीत मिल सकती है। लेकिन इसके लिए कुछ सीटों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जांजगीर चाम्पा जिले में हालिया सम्पन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिल पाई। पार्टी ने इसे गम्भीरता से लिया, क्योंकि जांजगीर प्रदेश का ऐसा इकलौता जिला रहा, जहां से पार्टी का खाता नहीं खुल पाया। रणनीतिकारों को लगता है कि लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में दिक्कत हो सकती है। इसलिए इस पर सबसे पहले फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा 2019 के चुनाव में भाजपा को जिन दो सीटों कोरबा और बस्तर में पराजय मिली थी, उस पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। शाह के 22 के होने जा रहे दौरे की शुरूआत बस्तर क्षेत्र से ही हो रही है। इन 3 सीटों के अलावा रायगढ़ और सरगुजा की सीटों पर भी पार्टी पहले चरण में प्रत्याशी घोषित करने की तैयारी में है।
कांग्रेस पर सीटें बचाने का दबाव
2019 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस को कुल 2 सीटें मिली थी। जबकि भाजपा को 9 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा द्वारा सभी 11 सीटें जीतने के दावों के बीच कांग्रेस पर अपने कोरबा और बस्तर की सीटें बचाने का भारी दबाव है। खबर है कि पार्टी कुछ सीटों पर अपने वरिष्ठ नेताओं को उतार सकती है। इनमें विधानसभा चुनाव हारे हुए मंत्रियों के नाम भी शामिल हैं। वहीं, युवा और नए चेहरों को भी टिकट देने की पैरवी की गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मार्च के दूसरे सप्ताह तक कांग्रेस अपने सभी 11 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर सकती है। पीसीसी सूत्रों की मानें तो पार्टी 6 सीटों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है। इनमें जांजगीर चांपा, राजनांदगांव, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़ और कांकेर की सीटें शामिल है। संभावना है कि इस बार भी टिकट वितरण में प्रादेशिक नेतृत्व के साथ ही पूर्व सीएम भूपेश बघेल को तवज्जो मिल सकती है।
लहराता रहा है भाजपाई परचम
2018 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्ता गंवाने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी लोकसभा की 11 में 9 सीटें अपने नाम करने में कामयाब रही। वहीं राज्य बनने के बाद से कांग्रेस 2004 और 2019 में ही 2 लोकसभा सीटों के आंकड़े तक पहुंची, जबकि बाकी के लोकसभा चुनाव में उसके खाते में हमेशा 1 ही सीट आई। इन आंकड़ों के बावजूद कांग्रेस दावों में पीछे नहीं है। कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस लोकसभा चुनाव में भाजपा से ज्यादा सीटें जीतेगी। जबकि भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास का दावा है कि पूरा प्रदेश मोदी मय है, मोदी गारंटी पूरी हो रही है। कांग्रेस में भगदड़ है। भाजपा छत्तीसगढ़ में 11 में से 11 सीट जीतेगी। राहुल गांधी की न्याय यात्रा के पास कांग्रेस उन सीटों पर उम्मीद लगा रही है, जहां से यह न्याय यात्रा गुजरी। हालांकि राहुल गांधी की यात्रा कितना असर छोड़ पाई, यह वक्त ही बताएगा।
कांकेर-जांजगीर में नहीं हारी भाजपा
रायपुर लोकसभा सीट 1952 से 1984 तक कांग्रेस का गढ़ रही। 1977 में भारतीय लोक दल के पुरुषोत्तम कौशिक जीते। 1989 में भाजपा के रमेश बैस सांसद बने। वहीं 1996 से लगातार रायपुर से भाजपा जीतती रही है। राजनांदगांव की बात करें तो कांग्रेस से 1998 में मोतीलाल वोरा और 2004 में देवब्रत सिंह चुनाव जीते। उसके बाद 3 बार से भाजपा जीत रही है। कांकेर लोकसभा सीट राज्य बनने के बाद भाजपा की होकर रह गई। वहीं, दुर्ग लोकसभा सीट में राज्य बनने के बाद 4 चुनावों में एक बार कांग्रेस के ताम्रध्वज साहू सांसद चुने गए तो 3 बार भाजपा का सांसद निर्वाचित हुआ। जांजगीर-चांपा में भी राज्य बनने के बाद भाजपा का कब्जा रहा है। बिलासपुर लोकसभा सीट में भी राज्य बनने के बाद से अब तक भाजपा का कब्जा है। महासमुंद में छत्तीसगढ़ पृथक राज्य बनने के बाद चार चुनाव हुए जिसमें 2004 में कांग्रेस के अजीत जोगी ने जीत दर्ज की, लेकिन इसके बाद से अब तक लगातार तीन बार भाजपा जीत रही है। बस्तर में भी 3 बार भाजपा का सांसद बना। वर्तमान में कांग्रेस से दीपक बैज सांसद हैं। सरगुजा सीट का हाल भी कमोबेश ऐसा ही है। राज्य बनने के बाद भाजपा इस सीट पर लगातार जीतती रही है। कोरबा लोकसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और उसके बाद दो लोकसभा चुनाव में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा ने जीत दर्ज की है।