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नई दिल्ली (ए)। पाकिस्तानी आर्मी ने पहली बार कारगिल जंग में अपनी भूमिका की बात स्वीकार की है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने एक कार्यक्रम के दौरान ये माना कि कारगिल जंग में पाकिस्तानी सेना शामिल थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के खिलाफ जंग में मारे गए पाकिस्तान के लोगों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में मुनीर ने कहा, “पाकिस्तानी समुदाय बहादुरों का समुदाय है जो ये जानता है कि आजादी की कीमत कैसे चुकानी है। चाहे वो 1948 की जंग हो या 1965, 1971 या 1999 का कारगिल युद्ध, हजारों सैनिकों ने इस्लाम और देश के लिए अपनी जान कुर्बान की।”
पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने 6 सितंबर को यह बयान दिया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह पहली बार है, जब पाकिस्तानी सेना के किसी अधिकारी ने जंग में पाकिस्तानी सैनिकों के शहीद होने की बात कही है।
इससे पहले तक पाकिस्तान ये दावे करता रहा है कि कारगिल जंग कश्मीर के मुजाहिदों ने छेड़ी थी। उसमें पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं थी। वहीं, भारत लगातार यह आरोप लगाता आया है कि कारगिल जंग LoC (नियंत्रण रेखा) को बदलकर कश्मीर पर कब्जा करने के लिए पाकिस्तान की सोची-समझी साजिश थी। कारगिल में लड़ाई की शुरुआत तब हुई, जब पाकिस्तानी सैनिकों ने यहां ऊंची पहाड़ियों पर चुपचाप कब्जा कर अपने ठिकाने बना लिए थे। 8 मई 1999 को कारगिल की आजम चौकी पर पाकिस्तान के करीब 12 जवानों ने कब्जा कर लिया था।
इन पाकिस्तानी सैनिकों को एक भारतीय चरवाहे ने देखा था। इस चरवाहे ने भारतीय सेना के जवानों को पाकिस्तानी सैनिकों के घुसपैठ की सूचना दी। इस तरह भारत को पहली बार घुसपैठ की जानकारी मिली। अभी तक भारत समझ रहा था कि थोड़े बहुत आतंकियों ने ही कश्मीर की घाटी पर कब्जा किया है, इसलिए भारत ने चंद सैनिकों को ही इन्हें खदेड़ने के लिए भेजा।
जब भारतीय सेना पर अलग-अलग चोटियों से जवाबी हमले हुए तब पता चला कि ये एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय की तैयारी शुरू की।
पाक सैनिक ऊंची पहाड़ियों पर बैठे थे, इस वजह से भारतीय सैनिकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। भारतीय जवानों ने दुश्मन की नजर से बचने के लिए रात में मुश्किल चढ़ाई की। शुरुआत में भारतीय सेना को इसी वजह से खासा नुकसान उठाना पड़ा।