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हेल्थ डेस्क। यात्रा को शुभ और मंगलकारी बनाने के लिए, एग्जाम या इंटरव्यू में जाते समय हम सब घर से दही-गुड़ या दही-शक्कर खाकर निकलते हैं। लेकिन आप यकीन करेंगे जिस दही को खाकर हम सब अपना सफर शुरू करते है, वह खुद एक लंबी यात्रा करके हमारी कटोरी तक पहुंचा है।

हेल्थ डेस्क। यात्रा को शुभ और मंगलकारी बनाने के लिए, एग्जाम या इंटरव्यू में जाते समय हम सब घर से दही-गुड़ या दही-शक्कर खाकर निकलते हैं। लेकिन आप यकीन करेंगे जिस दही को खाकर हम सब अपना सफर शुरू करते है, वह खुद एक लंबी यात्रा करके हमारी कटोरी तक पहुंचा है।
भारतीय खानपान का ही नहीं, बल्कि पूजा-पाठ का अभिन्न हिस्सा बन चुके दही की पैदाइशी हिंदुस्तानी है या नहीं, इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिलता।
फूड हिस्टोरियन केटी अचाया दही को विशुद्ध भारतीय मानते हैं, लेकिन विज्ञान की दुनिया में इसका जन्मस्थान बुल्गारिया बताया जाता है। कुछ इसे टर्किश लोगों की देन भी मानते हैं।
आज ‘फुरसत का रविवार’ है। नाश्ते या लंच में दही या रायता थाली में जरूर सजेगा। तो चलिए आज दही के किस्से स्वाद के साथ सुनाते हैं।
डॉक्टर स्टैमेन ग्रिगोरोव ने दही में बैक्टीरिया की खोज की

बुल्गारिया को दही का जन्मस्थान होने का श्रेय बुल्गेरियाई वैज्ञानिक डॉ. स्टैमेन ग्रिगोरोव को भी जाता है। उन्होंने दही जमने के लिए जिम्मेदार सूक्ष्मजीवों को पहचाना। इन सूक्ष्मजीवों को खोजने की कहानी भी दिलचस्प है।
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. स्टैमेन जिनेवा की मेडिकल यूनिवर्सिटी में रिसर्च असिस्टेंट हुआ करते थे। हर चीज के पीछे की वजह जानने का उन्हें ‘दिमागी खलल’ था।
1904 में अपनी शादी के कुछ दिनों बाद डॉ. स्टैमेन अपने काम पर लौटे तो उनकी नई-नवेली दुल्हन डारिंका ग्रिगोरोवा ने रास्ते में खाने के साथ थोड़ा सा दही भी पैक कर दिया।
डॉ. स्टैमेन ने रास्ते में दही तो खाया लेकिन उसमें से थोड़ा सा बचा भी लिया। और डॉ. स्टैमेन महीनों तक लैब में यह जानने के लिए जूझते रहे कि आखिर वो कौन सी चीज है जो दूध को दही में तब्दील कर देती है?
दही में ऐसा क्या है जो पेट को ठंडक देने के साथ भोजन को पचाने में भी मदद करता है।