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रायपुर। महादेव सट्टा ऐप मामले में एसीबी की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार निलंबित कांस्टेबल सहदेव सिंह यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 11 बैंक खातों में जमा 2 करोड़ रूपए को फ्रीज किया गया है। साथ ही एसीबी ने सट्टे के पैसे से खरीदी गई इनोवा को जब्त किया है।
दरअसल, महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा मामले में एसीबी की कार्रवाई के बाद से आरोपी सहदेव फरार चल रहा था। सहदेव महादेव सट्टा बुक के प्रमोटर्स सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, शुभम सोनी के संपर्क में रहकर हवाला लेनदेन में हाथ बटाने का काम करता था। एसीबी की टीम ने जब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और इस केस में कांस्टेबल सहदेव का नाम सामने आया तब से ही आरोपी फरार हो गया था। आरोपी पिछले तीन सालों से ऑनलाइन बुक पैनल को ऑपरेटर कर रहा था। महादेव सट्टा से जुड़ा एक पैनल पटना बिहार में संचालित था, जिस पर रायपुर पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
बता दें कि इस मामले में बुधवार को भी एसीबी ने कार्रवाई करते हुये जेल में बंद निलंबित एएसआई चंद्रभूषण के मैनेजर किशन वर्मा को गिरफ्तार किया था। अब तक की पूछताछ में आरोपी द्वारा जमीन क्रय किये जाने की जानकारी मिली है जिसकी जांच की जा रही है। आरोपी द्वारा और भी महत्वपूर्ण खुलासा किये जाने की सम्भावना है। प्रकरण में पूछताछ एवं अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
निलंबित एएसआई चंद्रभूषण वर्मा के मैनेजर किशन वर्मा को गिरफ्तार किया है। किशन ही सट्टे की अवैध रकम को संभालने और उसे वैध बनाने का काम करता था। आरोपी ने इसी तरह महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के द्वारा अवैध रूप से कमाए गए 58 करोड रुपए को अवैध से वैध किया था। आरोपी को गिरफ्तार कर आज ईओडब्ल्यू की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 19 जुलाई तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।
बता दे कि महादेव ऐप घोटाले के सभी आरोपियो की न्यायिक रिमांड 19 जुलाई को खत्म हो रही है। नीचे पढ़े ईओडब्ल्यू द्वारा जारी प्रेस नोट में गिरफ्तार आरोपी के संबंध में क्या कुछ लिखा गया है…
”आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जांच की जा रही महादेव ऑनलाईन बुक सट्टा मामले में आज किशन लाल वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में बताया कि उसके द्वारा चंद्रभूषण वर्मा, मो. जासिफ राहुल वक्टे आंदि लोगों के साथ मिलकर महादेव ऑनलाईन बुक सट्टा के प्रमोटर्स रवि उप्पल एवं अन्य माध्यमों से आये हवाला के माध्यम से आये 58 करोड़ रूपये से अधिक के रकम को फर्मों/ कंपनियों जैसे एम. के. इंटरप्राईजेस, आदित्य ट्रेडिंग कंपनी, सृजन एसोसिएट, सृजन इंटरप्राईजेस प्रा.लि., सृजन ट्रेडिंग कंपनी आदि के माध्यम से फर्जी /बोगस बिल, बैंक एन्ट्री दिलाकर अवैध रकम को वैध स्वरूप प्रदान करने में सहयोग किया गया है।
आरोपी किशन लाल वर्मा एम.के. इंटरप्राईजेस के प्रोप्राईटर भी हैं उसने फर्मों/कंपनियों के जरिये चंद्रभूषण वर्मा एवं अन्य के साथ मिलकर हवाला रकम को विभिन्न फर्मों / कंपनियों, जमीन खरीदने में निवेश एवं अन्य व्यक्तियों को वितरण में भी शामिल है। इसके बैंक खाते से 43 लाख से अधिक की रकम को फीज कराया गया है। प्रकरण में पूछताछ एवं अग्रिम वैधानिक कार्यवाही जारी है।”