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आगरा। राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं। राष्ट्र तभी सशक्त होगा, जब हम एक होंगे। बांग्लादेश में देख रहे हैं न, वो गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए…बंटेंगे तो कटेंगे। एक रहेंगे-नेक रहेंगे। सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा तक पहुंचेंगे।’ यूपी के CM योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आगरा में यह बात कही। वे यहां पुरानी मंडी चौराहे पर राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा- ‘मुझे लगता है कि 10 साल से यह प्रतिमा मेरा इंतजार कर रही थी। मेरे ऊपर उनकी कृपा हो गई। मुझे यहां आने का अवसर भी तब मिला, जब कृष्ण का जन्म हो रहा है। योगी ने राधे-राधे कहकर जनसभा में मौजूद लोगों को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।
योगी ने कहा- बहुत सारे लोगों ने मुगलों और अंग्रेजों के सामने समर्पण कर दिया था, लेकिन आज हम राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर जी का नाम ले रहे हैं। एक बार राजस्थान जाइए, देखिए उनकी पूजा होती है। जोधपुर में श्रद्धा का भाव देखने को मिलता है। मैं इसी श्रद्धा के भाव को मजबूत करने के लिए आया हूं। CM ने कहा- रामप्रसाद बिस्मिल को जब फांसी दी जा रही थी। तब उनसे पूछा गया कि अंतिम अभिलाषा हो तो बताइए। तब बिस्मिल जी ने कहा- इस भारत वर्ष में सौ बार मेरा जन्म हो और मौत का कारण सदा ही देश उपकार कर्म हो। बार-बार इस हिंदुस्तान की धरती पर जन्म लूं।
योगी ने कहा- हम इतिहास जानते हैं। कुछ तो औरंगजेब का इस आगरा से संबंध था। इसी आगरा में हिंदवी पद बादशाही के महानायक छत्रपति शिवाजी ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि तुम चूहे की तरह तड़पते रह जाओगे। हिंदुस्तान पर तुझे कब्जा नहीं करने देंगे।
राजस्थान में महाराजा जशवंत सिंह इस मोर्चे को संभाल रहे थे। महाराजा के महत्वपूर्ण सेनापति राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर थे। औरंगजेब ने कई बार कोशिश की, लेकिन कब्जा नहीं कर पाया। क्योंकि, जहां राष्ट्रवादी राठौर जैसे वीर हों, वहां कैसे कोई विदेशी आक्रांता कब्जा कर सकता है।
यही हुआ भी, लेकिन औरंगजेब दुष्ट था, चालबाज था। उसने एक चाल चली। महाराजा दशरथ सिंह से संधि कर ली। उसने कहा कि हम जोधपुर रियासत में कुछ नहीं करेंगे। आप हमारा सहयोग कीजिए। उसने लालच दिया और कहा कि अफगानी हिंदुस्तान पर कब्जा करने जा रहे हैं। आपको मोर्चा संभालाना पड़ेगा। वो धोखे से ले गया और उनकी हत्या कर दी।
हम जानते हैं कि आजादी के लिए 9 अगस्त 1925 में लखनऊ में राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना को अंजाम देकर अंग्रेजी हुकुमत को चुनौती दी थी। उस समय अंग्रेजी हुकूमत हिल गई थी। ट्रेन एक्शन में इन क्रांतिकारियों को महज 4 हजार 600 रुपए मिले थे। लेकिन, इन्हें गिरफ्तार करने, सजा दिलाने के लिए अंग्रेजों ने 10 लाख रुपए खर्च कर दिए। तब भी आजादी की लड़ाई कमजोर नहीं पड़ी। आगरा के कण-कण में भगवान कृष्ण का वास है। यहां कला है, यहां विश्वास है, यहां आस्था और समर्पण है। यह विश्वास और आस्था, कला-संस्कृति राष्ट्र प्रतिष्ठा के साथ आगे बढ़नी चाहिए।